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नहीं चलेंगे 2005 से पहले के नोट, ऐसे करें पुराने नोट की पहचान

साल 2005 से पहले छपे नोटों को बदलवाने के लिए अब जल्‍दबाजी करने की जरूरत नहीं है। रि‍जर्व बैंक ऑफ इंडि‍या (आरबीआई) ने ऐसे नोटों को बदले की अंति‍म तारीख बढ़ाकर 30 जून 2015 कर दी है जो कि‍ पहले 1 जनवरी 2015 थी। साल 2005 से पहले छपे नोटों को इससे पहले बदलवा लेना होगा। भारतीय रिजर्व बैंक ने 2005 से पहले छपे नोटों को परिचालन से हटाने की कवायद शुरू करने के बाद अब तक 144.66 करोड़ नोट अलग किए हैं, जिनका मूल्य 52,855 करोड़ रुपए है।
गौरतलब है कि 2005 के बाद छपे नोटों में सुरक्षा से जुड़े फीचर अधिक हैं, जिससे जाली नोटों को प्रचलन में आने से रोकने में मदद मिलती है। रिजर्व बैंक ने 22 जनवरी 2014 को कहा था कि वह एक अप्रैल से इस तरह के सभी नोट परिचालन से हटाएगा। 
 

बदले जाएंगे 100, 500, 1000 के नोट
आपकी जेब में पड़े 100, 500, 1000 आदि के नोट एक बार फिर देख लें, कहीं ये वर्ष 2005 से पहले के तो नहीं, क्योंकि अगर ऐसा है तो अब यह किसी काम के नहीं रहेंगे। भारतीय रिजर्व बैंक ने 30 जून 2015 के बाद इन नोटों को लेने से इनकार कर दिया है। नकली करंसी पर लगाम लगाने के लिए पिछले साल ही केंद्र सरकार ने वर्ष 2005 से पहले छपे नोट वापस लेने का फैसला किया था।

बैंकों में बदले जा रहे नोट
 
पुराने नोट बदलने के लिए बैंक शाखाओं और आरबीआई के काउंटरों में जाकर लोग इन्हें बदल सकते हैं। बैंकों की सभी शाखाओं में 2005 के पहले के नोटों को बदलने की प्रक्रिया जारी है। बैंक अधिकारियों के अनुसार ऐसे नोट के लिए लोगों को अपना अकाउंट नंबर और आइडेंटिटी प्रूफ देना होगा। यदि किसी का अकाउंट नहीं है तो इसके लिए उसे अपना एड्रेस प्रूफ देना होगा।

ये है पुराने नोट पहचानने का तरीका

वर्ष 2005 के पहले नोटों को पहचानना बहुत ही आसान है। दरअसल 2005 के पहले छपे नोटों पर प्रिटिंग का साल नहीं छपा है। वहीं 2005 के बाद छपे नोटों में आप साल देख सकते हैं।


नकली नोट पहचानने का तरीका

वाटर मार्क
 
किसी भी नोट पर वाटर मार्क जरूर देखें। सभी असली नोटों में महात्मा गांधी की फोटो बनी है। उसी फोटो को हल्के शेड में वाटरमार्क में भी बनाया गया है। जब नोट को आप थोड़ा तीरछा करेंगे तो यह दिखाई देगा। 
 
सिक्योरिटी थ्रेड

इसके बाद सिक्योरिटी थ्रेड पर गौर करें। नोट के बीच में यह सीधी लाइन के रूप में होता है। जिस पर हिंदी में भारत और आरबीआई लिखा होता है।
नकली नोट में ये काफी मोटा दिखाई देता है और आरबीआई व भारत क्लियर नहीं होता। ज्यादातर मार्केट में इसे ही ध्यान में रखकर असली नकली की पहचान की जाती है।

लेटेंट इमेज

नोट पर गांधी जी की फोटो के साइड में लेटेंट इमेज होती है, जिसमें जितने का नोट है उसकी संख्या लिखी होती है। नोट को सीधा करने पर ही यह दिखाई देती है। जबकि नकली नोट में ये इमेज उभर कर नहीं आती। 

माइक्रोलेटरिंग

नोट में बनी गांधी जी की फोटो टीक बाजू में माइक्रोलेटरिंग होती है।5 रुपए, 10 रुपए और 20 रुपए के नोट में यहां पर आरबीआई लिखा होता है। इनसे ऊपर के नोटों में नोट वेल्यू होती है। जैसे 500 रुपए के नोट में माइक्रोलेटर्स में 500 लिखा होता है। यही असली नोट की पहचान है।

इंटेग्लिओ प्रिंटिंग

नोट पर विशेष प्रकार की प्रिटिंग इंक उपयोग की जाती है। इस इंक की वजह से महात्मा गांधी की फोटो, आरबीआई की सील और प्रोमाइसिस क्लॉस, आरबीआई गवर्नर के साइन को टच करने पर यह उभरे हुए महसूस होते हैं। इन्हें हाथ से महसूस किया जा सकता है।

आईडेंटिफिकेशन मार्क

यह खास तरह का मार्क होता है जो वाटर मार्क के बाईं ओर होता है। सभी नोटों में यह अलग आकार का होता है। 20 रुपए में ये वर्टिकल रेक्टेंगल, 50 रुपए में चकोर, 100 रुपए में ट्राइएंगल, 500 रुपए में गोल और 1000 रुपए में डायमंड शेप में होता है। 
 
फ्लोरेसेंस
 

नोट पर नीचे की ओर विशेष नंबर होते हैं जो कि इसकी सीरीज को दर्शाते हें। इन्हें फोरेसेंस इंक से प्रिंट किया जाता है। जब नोट को अल्ट्रा वॉइलेट लाइट में ले जाया जाता है तो ये नंबर उभर कर दिखाई देते हैं।
 
ऑप्टिकल वेरिएबल इंक

इस विशेष इंक का इस्तेमाल 1000 और 500 के नोट में किया गया है। नोट में बीचों बीच लिखे 500 और 1000 के अंक को प्रिंट करने में इस इंक का उपयोग किया जाता है। जब नोट फ्लैट होता है तो ये अंक हरे रंग के दिखाई देते हैं और इसके एंगल को बदलने पर इनका कलर बदल जाता है।

सी थ्रू रजिस्ट्रेशन

वाटर मार्क के साइड में यह फ्लोरल डिजाइन के रूप में होता है। यह नोट के दोनो साइड दिखाई देता है। एक साइड यह रिक्त होता है और दूसरी साइड यह भरा हुआ दिखाई देता है। इसकी पहचान करना थोड़ा मुश्किल होता है, लेकिन ध्यान से देखने पर इसे देखा जा सकता है।
 

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